क्या लिपस्टिक में सच में खून मिलाया जाता है?
नहीं, यह पूरी तरह से गलत धारणा है। किसी भी ब्रांडेड लिपस्टिक में जानवरों का खून नहीं मिलाया जाता है।
यह अफवाह बहुत पुरानी है। लोग लाल रंग देखकर सोचते हैं कि यह खून से बना है।
असलियत यह है कि लिपस्टिक में रंग देने के लिए पिगमेंट्स और डाई का इस्तेमाल होता है।
कुछ केमिकल्स और नेचुरल इंग्रीडिएंट्स मिलाकर लाल रंग बनाया जाता है। खून का कोई इस्तेमाल नहीं होता।
तो फिर लाल रंग कहां से आता है?
लिपस्टिक का लाल रंग मुख्य रूप से कारमाइन नाम के तत्व से आता है। यह एक नेचुरल रेड पिगमेंट है।
कारमाइन कोचीनियल नाम के कीड़ों से बनाया जाता है। ये कीड़े कैक्टस पर पाए जाते हैं।
इन कीड़ों को सुखाकर पीसा जाता है। फिर उससे लाल रंग का पाउडर निकलता है।
यह पूरी तरह से नेचुरल प्रोसेस है। लेकिन यह खून नहीं है, बल्कि कीड़ों से बना पिगमेंट है।
इसे फूड और कॉस्मेटिक्स दोनों में सुरक्षित माना जाता है। इसका कोड नंबर E120 या Natural Red 4 है।
क्या लिपस्टिक में मछली के पार्ट्स होते हैं?
हां, कुछ लिपस्टिक में मछली के स्केल्स से बना तत्व होता है। इसे गुआनिन कहते हैं।
गुआनिन लिपस्टिक को शाइनी और ग्लॉसी बनाता है। वह चमक जो आपको दिखती है, वह इसी से आती है।
मछली के शल्क को केमिकल प्रोसेस से ट्रीट किया जाता है। फिर उससे यह शिमरिंग पार्टिकल्स बनते हैं।
सभी ब्रांड्स इसका इस्तेमाल नहीं करते। मैट लिपस्टिक में यह नहीं होता। सिर्फ ग्लॉसी वाली में होता है।
अब कई ब्रांड्स इसकी जगह माइका और सिंथेटिक पर्ल्स का इस्तेमाल करते हैं। वह वीगन ऑप्शन है।
भेड़ की चर्बी भी लिपस्टिक में होती है?
भेड़ की चर्बी नहीं, लेकिन उनकी ऊन से निकला लैनोलिन जरूर होता है। यह एक तरह का नेचुरल वैक्स है।
लैनोलिन होंठों को मॉइश्चराइज करता है। यह लिपस्टिक को स्मूद बनाता है और होंठ फटने से बचाता है।
यह बहुत कॉमन इंग्रीडिएंट है। ज्यादातर मॉइश्चराइजिंग लिपस्टिक में यह पाया जाता है।
अगर आप यह नहीं चाहते तो वीगन लिपस्टिक की तलाश करें। उनमें यह नहीं होता।
मधुमक्खी का मोम भी इस्तेमाल होता है क्या?
बिल्कुल, बीसवैक्स यानी मधुमक्खी का मोम लिपस्टिक की बेस बनाने में काम आता है।
यह लिपस्टिक को सॉलिड शेप देता है। बिना इसके लिपस्टिक पिघल जाएगी।
बीसवैक्स नेचुरल होता है और स्किन के लिए सेफ है। यह होंठों पर प्रोटेक्टिव लेयर बनाता है।
मधुमक्खी के छत्ते से यह निकाला जाता है। इसमें नेचुरल एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं।
वीगन लिपस्टिक में इसकी जगह कार्नाबा वैक्स या कैंडेलिला वैक्स इस्तेमाल होता है।
जानवरों की चर्बी का क्या?
पुराने जमाने में कुछ कंपनियां एनिमल फैट यानी टैलो का इस्तेमाल करती थीं। यह गाय या सूअर की चर्बी होती थी।
लेकिन अब ज्यादातर ब्रांड्स प्लांट-बेस्ड ऑयल्स का इस्तेमाल करते हैं। जैसे कैस्टर ऑयल, कोकोनट ऑयल।
आजकल के मॉडर्न फॉर्मूलेशन में एनिमल फैट लगभग नहीं के बराबर मिलता है। खासकर रेपुटेड ब्रांड्स में।
अगर चिंता है तो इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर चेक करें। वहां सब कुछ लिखा होता है।
या फिर सर्टिफाइड वीगन प्रोडक्ट्स खरीदें। उनमें कोई एनिमल प्रोडक्ट नहीं होता।
भारत में जानवरों पर टेस्टिंग होती है?
नहीं, भारत में कॉस्मेटिक्स की एनिमल टेस्टिंग बैन है। यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।
2014 में भारत सरकार ने यह कानून पास किया था। अब कोई भी कंपनी जानवरों पर टेस्ट नहीं कर सकती।
यह एक बड़ा कदम था एनिमल राइट्स के लिए। भारत इस मामले में दुनिया के टॉप देशों में आता है।
अगर कोई कंपनी टेस्टिंग करती पकड़ी जाए तो उस पर भारी जुर्माना लगता है।
CDSCO यानी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन यह सब मॉनिटर करता है।
वीगन लिपस्टिक क्या होती है?
वीगन लिपस्टिक वह होती है जिसमें जानवरों से बना कोई भी तत्व नहीं होता। पूरी तरह प्लांट-बेस्ड होती है।
इसमें न कारमाइन होता है, न बीसवैक्स, न लैनोलिन। सब कुछ वेजिटेबल सोर्स से होता है।
लाल रंग के लिए बीटरूट, फ्रूट एक्सट्रैक्ट या मिनरल पिगमेंट्स का इस्तेमाल होता है।
चमक के लिए माइका और प्लांट-बेस्ड शिमर पार्टिकल्स डाले जाते हैं।
आजकल बहुत सारे इंडियन और इंटरनेशनल ब्रांड्स वीगन लिपस्टिक बना रहे हैं। ये उतनी ही अच्छी होती हैं।
कैसे पता करें कि लिपस्टिक वीगन है?
सबसे आसान तरीका है पैकेजिंग पर देखना। वीगन लिपस्टिक पर ‘Vegan’ या ‘V’ मार्क होता है।
क्रुएल्टी-फ्री का भी लोगो देखें। यह दिखाता है कि एनिमल टेस्टिंग नहीं हुई है।
इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ें। अगर कारमाइन, लैनोलिन, बीसवैक्स या गुआनिन लिखा है तो वह वीगन नहीं है।
कुछ वेबसाइट्स भी हैं जो वीगन प्रोडक्ट्स की लिस्ट रखती हैं। वहां चेक कर सकते हैं।
या फिर ब्रांड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर कंफर्म करें। ज्यादातर कंपनियां यह जानकारी देती हैं।
क्या वीगन लिपस्टिक कम क्वालिटी की होती है?
बिल्कुल नहीं, यह सिर्फ एक मिथ है। वीगन लिपस्टिक क्वालिटी में किसी से कम नहीं होती।
आजकल की टेक्नोलॉजी से प्लांट-बेस्ड इंग्रीडिएंट्स उतने ही इफेक्टिव बनाए जा रहे हैं।
रंग, स्टेइंग पावर, मॉइश्चर – सब कुछ नॉर्मल लिपस्टिक जितना ही अच्छा होता है।
बस आपको सही ब्रांड चुनना होता है। मार्केट में अच्छे और बुरे दोनों तरह के ऑप्शन हैं।
कुछ टॉप ब्रांड्स पूरी तरह से वीगन हो गए हैं। उनकी क्वालिटी किसी से पीछे नहीं।
लिपस्टिक खरीदते वक्त क्या देखें?
सबसे पहले इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर पढ़ें। अगर आप वीगन प्रोडक्ट चाहते हैं तो वह चेक करें।
सर्टिफिकेशन देखें जैसे क्रुएल्टी-फ्री, वीगन, ऑर्गेनिक। ये लोगो भरोसेमंद होते हैं।
ब्रांड की रेपुटेशन भी मायने रखती है। जाने-माने ब्रांड्स अच्छी क्वालिटी मेंटेन करते हैं।
रिव्यूज पढ़ें ऑनलाइन। दूसरे कस्टमर्स के अनुभव से आपको सही आइडिया मिलेगा।
अपनी स्किन टाइप के हिसाब से भी चुनें। ड्राई लिप्स हैं तो मॉइश्चराइजिंग लिपस्टिक लें।
सच्चाई क्या है फिर?
सच यह है कि लिपस्टिक में खून नहीं होता। यह सिर्फ अफवाह और गलतफहमी है।
हां, कुछ एनिमल-बेस्ड इंग्रीडिएंट्स इस्तेमाल होते हैं जैसे कारमाइन और बीसवैक्स। लेकिन खून नहीं।
आजकल बहुत सारे वीगन ऑप्शन्स भी मिल रहे हैं। आप चुन सकते हैं।
भारत में एनिमल टेस्टिंग बैन है। तो कंपनियां जानवरों पर क्रूरता नहीं करतीं।
इंफॉर्मेशन के साथ शॉपिंग करें। लेबल पढ़ें। सही चुनाव करें।