शाम की चाय हो या अचानक भूख लगे, समोसा हमारी फर्स्ट च्वाइस है। हर नुक्कड़ पर मिलता है, सस्ता है और टेस्टी भी।
ऑफिस के बाहर, कॉलेज कैंटीन या रेलवे स्टेशन – हर जगह समोसे की महक आपको खींच लेती है। यह भारतीयों का फेवरेट स्नैक बन चुका है।
लेकिन इस क्रिस्पी और टेस्टी समोसे के अंदर क्या छुपा है? मैदा, तला हुआ तेल, आलू और मसाले। यह कॉम्बिनेशन सेहत के लिए बम है।
रोज समोसा खाने वाले लोग खुद को धोखा दे रहे हैं। वे सोचते हैं बस एक छोटा सा स्नैक है, क्या होगा।
लेकिन यह “छोटा स्नैक” धीरे-धीरे आपके शरीर को बीमार बना रहा है। पेट की चर्बी, हार्ट की प्रॉब्लम और डायबिटीज – सब यहीं से शुरू होता है।
आज हम खोलकर बताएंगे कि समोसा खाने से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं। और क्यों डॉक्टर इससे दूर रहने की सलाह देते हैं।
Maida Makes It Dangerously Unhealthy
समोसे की बाहरी परत मैदे से बनती है। मैदा यानी refined flour जो गेहूं से तो बनता है लेकिन इसकी सारी पौष्टिकता निकाल ली जाती है।
मैदे में फाइबर बिल्कुल नहीं होता। विटामिन्स और मिनरल्स भी खत्म हो जाते हैं। बचती है सिर्फ स्टार्च और कैलोरी।
जब आप समोसा खाते हैं तो यह मैदा आपकी आंतों में चिपक जाता है। यह पचता नहीं बल्कि जमा होता रहता है।
इससे कब्ज की प्रॉब्लम शुरू होती है। पेट साफ नहीं होता। गैस और एसिडिटी बनने लगती है।
मैदा ब्लड शुगर को भी तेजी से बढ़ाता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत हाई है। यानी खाते ही शुगर लेवल शूट हो जाता है।
बार-बार यह होने से पैन्क्रियाज थक जाता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। और धीरे-धीरे डायबिटीज की ओर बढ़ते हैं आप।
डॉक्टर्स मैदे को सफेद जहर कहते हैं। और समोसा इस जहर का सबसे पॉपुलर रूप है।
Reused Oil Contains Toxic Elements
समोसे की असली समस्या है उसे फ्राई करने का तेल। बाजार में जो समोसे बिकते हैं वे एक ही तेल में बार-बार तले जाते हैं।
सुबह से शाम तक वही तेल गर्म होता रहता है। इसमें से धुआं निकलता है लेकिन दुकानदार बदलता नहीं।
जब तेल को बार-बार गर्म किया जाता है तो उसमें से ट्रांस फैट बनने लगता है। यह सबसे खतरनाक फैट है।
ट्रांस फैट सीधे आपकी धमनियों में जमता है। यह गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।
नतीजा होता है हार्ट में ब्लॉकेज। युवाओं में भी अब हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। जंक फूड इसका बड़ा कारण है।
रिसर्च बताती है कि बार-बार गर्म किया तेल कैंसर का भी कारण बन सकता है। इसमें कार्सिनोजेनिक तत्व बनते हैं।
घर में अगर आप समोसा बनाते हैं तो भी ध्यान रखें। एक बार इस्तेमाल के बाद तेल को फेंक दें।
लेकिन बाजार में तो यह संभव ही नहीं। इसलिए बाहर का समोसा खाना सबसे ज्यादा खतरनाक है।
Obesity Starts With Daily Samosas
एक समोसे में लगभग 250 से 300 कैलोरी होती है। और कोई अकेले एक समोसा थोड़े ही खाता है।
आमतौर पर लोग दो समोसे खाते हैं। मतलब 500-600 कैलोरी सिर्फ स्नैक्स से। इसमें पोषण जीरो, फैट भरपूर।
यह कैलोरी एंप्टी कैलोरी है। यानी कोई फायदा नहीं सिर्फ मोटापा। और सबसे पहले पेट पर चर्बी जमती है।
बेली फैट सबसे खतरनाक होता है। यह सिर्फ दिखने की समस्या नहीं बल्कि कई बीमारियों की जड़ है।
समोसा खाने के बाद आपको भूख फिर से जल्दी लगती है। क्योंकि इसमें प्रोटीन और फाइबर नहीं है।
तो आप फिर कुछ और खा लेते हैं। यह साइकिल चलती रहती है। और वजन बढ़ता रहता है।
महीनों तक रोज समोसा खाने वाले लोग देखें तो उनका वजन जरूर बढ़ा होगा। और पेट निकल आया होगा।
वेट लॉस करना चाहते हैं तो सबसे पहले समोसा और ऐसे फ्राइड स्नैक्स बंद करें।
Diabetes Risk Increases Rapidly
समोसे में दो चीजें हैं – मैदा और आलू। दोनों का ही ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत हाई है।
जब आप समोसा खाते हैं तो ब्लड में शुगर का लेवल अचानक बढ़ जाता है। पैन्क्रियाज को तुरंत इंसुलिन रिलीज करना पड़ता है।
यह प्रोसेस रोज होती रहे तो पैन्क्रियाज थक जाता है। धीरे-धीरे इंसुलिन बनाना कम हो जाता है।
या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रहतीं। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं।
यह स्थिति सीधे टाइप-2 डायबिटीज की ओर ले जाती है। और एक बार डायबिटीज हो जाए तो जीवनभर रहती है।
भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। और इसमें खान-पान की गलत आदतों का बड़ा हाथ है।
अगर आपके परिवार में किसी को डायबिटीज है तो आपको और सावधान रहना चाहिए। समोसा जैसी चीजों से दूर रहें।
प्री-डायबिटिक लोगों के लिए तो समोसा बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। यह आपकी कंडीशन को डायबिटीज में बदल सकता है।
Heart Disease Risk Gets Higher
हार्ट अटैक अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही। 30-40 साल के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।
इसकी एक बड़ी वजह है अनहेल्दी खाना। और समोसा इस लिस्ट में टॉप पर है।
समोसे में मौजूद ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट धमनियों में जमा होते हैं। इससे ब्लॉकेज बनने लगती है।
कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ता है। LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
धीरे-धीरे हार्ट को खून सप्लाई करने वाली धमनियां संकरी हो जाती हैं। हार्ट पर दबाव बढ़ता है।
फिर एक दिन अचानक हार्ट अटैक हो सकता है। या फिर बाईपास सर्जरी की नौबत आ सकती है।
रोज समोसा खाने वाले लोगों में हार्ट डिजीज का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। यह कोई मजाक नहीं है।
अगर आपको हार्ट की फैमिली हिस्ट्री है तो बिल्कुल सावधान रहें। फ्राइड और जंक फूड से दूर रहें।
Blood Pressure Shoots Up Fast
समोसे में नमक की मात्रा भी काफी होती है। खासकर उसकी फिलिंग में और ऊपर से डाली जाने वाली चटनी में।
अधिक नमक यानी अधिक सोडियम। यह सीधे ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।
जब सोडियम ज्यादा होता है तो शरीर पानी रोकने लगता है। ब्लड वॉल्यूम बढ़ता है और प्रेशर बढ़ जाता है।
हाई BP साइलेंट किलर कहलाता है। शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते लेकिन धीरे-धीरे नुकसान करता रहता है।
यह किडनी, हार्ट और ब्रेन तीनों को प्रभावित करता है। स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आपको पहले से BP की प्रॉब्लम है तो समोसा बिल्कुल अवॉइड करें। यह आपकी दवाइयों को बेअसर कर सकता है।
और अगर अभी BP नॉर्मल है तो भी सावधान रहें। रोज समोसा खाने से जल्द ही BP की समस्या शुरू हो सकती है।
Digestive System Faces Major Issues
पाचन तंत्र पर समोसे का सबसे बुरा असर पड़ता है। मैदा और तेल का कॉम्बिनेशन पचाना मुश्किल है।
खाने के बाद पेट भारी लगता है। गैस बनती है। कई बार तो एसिडिटी और सीने में जलन भी होती है।
मैदे में फाइबर न होने से कब्ज की समस्या होती है। पेट ठीक से साफ नहीं होता।
लंबे समय तक ऐसा खाना खाते रहें तो पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है। गैस्ट्राइटिस हो सकता है।
कुछ लोगों को समोसा खाने के बाद पेट दर्द भी होता है। यह संकेत है कि आपका शरीर इसे स्वीकार नहीं कर रहा।
बाजार के समोसे में हाइजीन की भी कमी होती है। इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
उल्टी, दस्त और पेट खराब होना आम बात है। खासकर गर्मियों में जब समोसे घंटों खुले में रखे रहते हैं।
अगर आपको IBS या कोई पेट की पुरानी समस्या है तो समोसा आपके लिए बिल्कुल नहीं है।
Skin Problems Start Appearing Soon
जो आप खाते हैं वही आपकी स्किन पर दिखता है। समोसा जैसा ऑयली खाना स्किन के लिए बुरा है।
तेल और मैदा से शरीर में inflammation बढ़ता है। इससे पिंपल्स और एक्ने होने लगते हैं।
खासकर युवाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। वे जंक फूड खाते हैं और फिर पिंपल्स की शिकायत करते हैं।
समोसे में मौजूद ट्रांस फैट स्किन की कोशिकाओं को डैमेज करते हैं। त्वचा की नेचुरल ग्लो खत्म हो जाती है।
झुर्रियां जल्दी आने लगती हैं। स्किन ड्राई और बेजान दिखती है। डार्क सर्कल्स भी बढ़ सकते हैं।
अगर आप अच्छी स्किन चाहते हैं तो पहले अपनी डाइट ठीक करें। बाहरी क्रीम से ज्यादा जरूरी है अंदर से पोषण।
समोसा और ऐसे फ्राइड फूड छोड़ दें। कुछ हफ्तों में ही फर्क दिखने लगेगा।
Better Alternatives To Try Now
समोसे की क्रेविंग हो तो क्या करें? कुछ हेल्दी ऑप्शन्स भी हैं।
घर पर गेहूं के आटे से समोसा बनाएं। मैदे की जगह आटा इस्तेमाल करें। यह ज्यादा पौष्टिक होगा।
एयर फ्रायर का इस्तेमाल करें। इसमें बहुत कम तेल में या बिना तेल के भी समोसे बन जाते हैं।
या फिर ओवन में बेक कर लें। यह डीप फ्राई से बहुत बेहतर ऑप्शन है।
फिलिंग में सिर्फ आलू की जगह मिक्स वेजिटेबल्स डालें। प्रोटीन के लिए पनीर भी मिला सकते हैं।
समोसे की जगह धोकला, इडली या पोहा जैसे हेल्दी स्नैक्स चुनें। ये टेस्टी भी हैं और सेहतमंद भी।
मखाने, भुने चने या फ्रूट चाट भी अच्छे ऑप्शन्स हैं। ये पेट भी भरते हैं और कैलोरी कम होती है।
अगर बाहर का समोसा ही खाना है तो महीने में एक-दो बार से ज्यादा नहीं। रोज की आदत बिल्कुल न बनाएं।
Final Health Advice For Everyone
समोसा खाना गलत नहीं है लेकिन इसे रोज की आदत बनाना खतरनाक है।
यह सिर्फ स्नैक नहीं बल्कि आपकी सेहत का दुश्मन बन सकता है। मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज – सब यहीं से शुरू होता है।
अपनी जीभ के स्वाद के लिए अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें। थोड़ी सावधानी आपको बड़ी बीमारियों से बचा सकती है।
बाजार का समोसा तो बिल्कुल अवॉइड करें। घर पर हेल्दी तरीके से बनाएं तो कभी-कभार खा सकते हैं।
अपनी डाइट में फल, सब्जियां, दाल और साबुत अनाज शामिल करें। यह असली पोषण देंगे।
जंक फूड को ट्रीट की तरह रखें न कि रोज की आदत। यही स्मार्ट एप्रोच है।
याद रखें कि सेहत एक बार खराब हो जाए तो उसे ठीक करना मुश्किल है। बचाव ही बेहतर इलाज है।
आज से ही अपनी खान-पान की आदतों पर ध्यान दें। छोटे बदलाव बड़ा फर्क लाते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह लें।