Daily GK Quiz In Hindi: कौनसी बीमारियां हो सकती है चाय पीने से?

By: Vishal Bhardwaj

On: January 5, 2026

Daily GK in Hindi
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भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है। यह हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी है। सुबह उठते ही चाय, दोपहर में चाय, शाम को चाय।

ऑफिस में मीटिंग हो या घर पर मेहमान आएं, हर जगह चाय जरूरी है। कुछ लोग तो दिन में सात-आठ कप तक चाय पी लेते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी सेहत के साथ क्या कर रही है? शायद नहीं। हम बस पीते चले जाते हैं।

असल में चाय पीना गलत नहीं है। समस्या तब शुरू होती है जब यह लत बन जाए। जब आप बिना चाय के काम ही न कर पाएं।

और सबसे बड़ी समस्या है चाय में मिलाई जाने वाली चीनी। भारतीय घरों में बिना चीनी की चाय शायद ही कोई पीता है।

हर कप में कम से कम एक चम्मच चीनी तो जाती ही है। कई लोग तो दो-तीन चम्मच तक डाल देते हैं।

अब आप खुद सोचिए कि दिन भर में कितनी चीनी आपके शरीर में जा रही है। यह सीधा आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

Tea And Diabetes Connection Explained

मधुमेह यानी डायबिटीज आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है। हर तीसरा व्यक्ति इससे पीड़ित है या होने वाला है।

डॉक्टर कहते हैं कि खराब खान-पान और जीवनशैली इसकी मुख्य वजह है। और चाय इसमें बड़ी भूमिका निभाती है।

जब आप मीठी चाय पीते हैं तो उसमें मौजूद शुगर तेजी से खून में मिल जाती है। यह आपके ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देती है।

शुरुआत में शरीर इसे संभाल लेता है। पैन्क्रियाज से इंसुलिन निकलता है और शुगर को नियंत्रित करता है।

लेकिन जब यह रोज का सिलसिला बन जाए तो पैन्क्रियाज थक जाता है। वह पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता।

या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं।

यही वह स्थिति है जो टाइप-2 डायबिटीज की शुरुआत होती है। और एक बार यह रोग हो जाए तो जीवनभर साथ रहता है।

चाय के साथ बिस्कुट, नमकीन या मठरी लेने की आदत तो और भी खतरनाक है। यह कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट को दोगुना कर देती है।

Daily GK in Hindi

How Sugar Damages Your Body

चीनी को सफेद जहर कहा जाता है और यह बिल्कुल सही है। अधिक चीनी का सेवन शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचाता है।

जब आप चीनी खाते हैं तो वह पाचन के बाद ग्लूकोज में बदल जाती है। यह ग्लूकोज खून में मिलता है।

सामान्य स्थिति में यह ऊर्जा का काम करता है। लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा हो जाए तो समस्या शुरू होती है।

अतिरिक्त ग्लूकोज लिवर में जाकर फैट में बदल जाता है। यह फैट लिवर, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों में जमा होने लगता है।

इससे मोटापा बढ़ता है। और मोटापा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का मुख्य कारण है।

चीनी दांतों को भी खराब करती है। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया चीनी को एसिड में बदल देते हैं जो दांतों को गला देता है।

त्वचा पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। अधिक शुगर त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और झुर्रियां जल्दी आती हैं।

दिमाग की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। शोध बताते हैं कि अधिक चीनी खाने से याददाश्त कमजोर हो सकती है।

Empty Stomach Tea Is Harmful

बहुत से लोगों की आदत है कि वे सुबह उठते ही सबसे पहले चाय पीते हैं। कुछ खाते-पीते नहीं, सीधे चाय।

यह सबसे खतरनाक आदत है। खाली पेट चाय पीना आपके पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है।

चाय में टैनिन नामक तत्व होता है। यह पेट में एसिड के स्राव को बढ़ा देता है। जब पेट खाली होता है तो यह एसिड पेट की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है।

इससे गैस, एसिडिटी और पेट में जलन की समस्या होती है। लंबे समय तक ऐसा करने से अल्सर भी हो सकता है।

खाली पेट चाय पीने से मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो जाता है। यह वजन बढ़ाने में योगदान देता है।

इसके अलावा यह आपकी भूख को भी प्रभावित करता है। चाय पीने के बाद भूख कम लगती है और आप नाश्ता छोड़ देते हैं।

नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। इसे छोड़ना सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि सुबह उठने के बाद सबसे पहले गुनगुना पानी पिएं। फिर कुछ खाएं और उसके बाद ही चाय लें।

Caffeine Increases Blood Sugar Levels

चाय में कैफीन होता है। यह वही तत्व है जो कॉफी में भी पाया जाता है। कैफीन दिमाग को सक्रिय करता है।

इसीलिए चाय पीने के बाद हम तरोताजा और एनर्जेटिक महसूस करते हैं। नींद भी भाग जाती है।

लेकिन कैफीन के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं। खासकर जब इसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए।

कैफीन शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाता है। इनमें मुख्य है कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन। यह हार्मोन खतरे के समय शरीर को सक्रिय करते हैं।

जब ये हार्मोन बढ़ते हैं तो लिवर में जमा ग्लाइकोजन टूटकर ग्लूकोज में बदलने लगता है। यह ग्लूकोज खून में रिलीज होता है।

इससे ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है। अगर आप डायबिटिक हैं तो यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है।

रोजाना कई कप चाय पीने से लगातार कैफीन शरीर में जाता रहता है। यह इंसुलिन की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।

इंसुलिन का काम है शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाना। जब इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो शुगर खून में ही रह जाता है।

Milk Tea Contains Hidden Calories

भारत में अधिकतर लोग दूध वाली चाय पीते हैं। इसे हम मिल्क टी या मसाला चाय कहते हैं।

दूध से चाय का स्वाद तो बढ़ जाता है लेकिन कैलोरी भी काफी बढ़ जाती है। खासकर अगर फुल क्रीम दूध इस्तेमाल किया जाए।

एक कप दूध वाली चाय में लगभग 30 से 40 कैलोरी दूध से आती है। इसमें चीनी की कैलोरी अलग से जुड़ती है।

एक चम्मच चीनी में करीब 20 कैलोरी होती है। अगर आप दो चम्मच डालते हैं तो 40 कैलोरी और बढ़ गई।

इस तरह एक कप मीठी दूध वाली चाय में कुल 70 से 80 कैलोरी हो जाती है। अब दिन में पांच कप पीने का हिसाब लगाइए।

यह हो गई 350 से 400 कैलोरी सिर्फ चाय से। यह एक पूरे भोजन के बराबर है।

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं या डायबिटीज से बचना चाहते हैं तो यह अतिरिक्त कैलोरी बहुत नुकसानदायक है।

फुल क्रीम दूध में सैचुरेटेड फैट भी होता है। यह कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।

Tea Disrupts Your Sleep Cycle

नींद हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। अच्छी नींद से शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है।

लेकिन चाय में मौजूद कैफीन नींद को प्रभावित करता है। खासकर अगर आप शाम या रात में चाय पीते हैं।

कैफीन दिमाग में एडेनोसिन नामक रसायन को ब्लॉक करता है। यह रसायन हमें नींद लाने में मदद करता है।

जब एडेनोसिन ब्लॉक हो जाता है तो दिमाग सक्रिय रहता है। नींद आने में दिक्कत होती है।

बहुत से लोग रात 8-9 बजे भी चाय पी लेते हैं। फिर रात को सोते समय उन्हें नींद नहीं आती।

नींद पूरी न होने से शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है। खासकर इंसुलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन प्रभावित होते हैं।

नींद की कमी से भूख बढ़ती है। आपको बार-बार कुछ खाने का मन करता है। खासकर मीठी और तली चीजें खाने का।

यह सब मिलकर वजन बढ़ाने और डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने में योगदान देते हैं।

शोध बताते हैं कि जो लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना 30% अधिक होती है।

Tanin Causes Digestive Problems

चाय में टैनिन नामक कंपाउंड होता है। यह एक प्रकार का पॉलीफेनॉल है जो चाय को उसका रंग और स्वाद देता है।

थोड़ी मात्रा में टैनिन फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अधिक मात्रा में यह पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है।

टैनिन पेट में एसिड बनाता है। यह गैस्ट्रिक जूस के स्राव को बढ़ा देता है। खाली पेट इसका असर और भी खराब होता है।

अधिक एसिड से पेट में जलन, एसिडिटी और अपच की समस्या होती है। कुछ लोगों को उल्टी का भी अनुभव होता है।

टैनिन पोषक तत्वों के अवशोषण को भी रोकता है। खासकर आयरन का अवशोषण प्रभावित होता है।

अगर आप खाने के तुरंत बाद चाय पीते हैं तो भोजन से मिलने वाला आयरन शरीर में ठीक से नहीं जाता।

इससे खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या हो सकती है। महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है।

टैनिन कब्ज भी पैदा कर सकता है। यह आंतों की गतिविधि को धीमा कर देता है।

लंबे समय तक कब्ज रहने से और भी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। बवासीर और फिशर जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

Different Types Of Tea Impact

सभी चाय एक जैसी नहीं होतीं। अलग-अलग प्रकार की चाय का असर भी अलग होता है।

सामान्य दूध वाली चाय जिसे हम रोज पीते हैं, वह सबसे ज्यादा नुकसानदायक है। इसमें चीनी, दूध और कैफीन तीनों होते हैं।

ब्लैक टी यानी बिना दूध की चाय थोड़ी बेहतर है। इसमें कैलोरी कम होती है। लेकिन अगर चीनी डालें तो वही समस्या।

ग्रीन टी को सबसे स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं।

ग्रीन टी मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है और वजन कम करने में मदद करती है। लेकिन इसमें भी कैफीन होता है।

अगर ग्रीन टी भी अधिक मात्रा में पी जाए तो नुकसान हो सकता है। संयमित मात्रा में ही इसके फायदे मिलते हैं।

हर्बल टी जैसे कैमोमाइल, पेपरमिंट या अदरक की चाय बेहतर विकल्प हैं। इनमें कैफीन नहीं होता।

ये पाचन में मदद करती हैं और शरीर को शांत करती हैं। रात में सोने से पहले हर्बल टी पी सकते हैं।

लेकिन याद रखें कि किसी भी चाय में चीनी न मिलाएं। चीनी किसी भी चाय को नुकसानदायक बना देती है।

Signs Your Body Needs Less Tea

शरीर हमें संकेत देता है जब कोई चीज उसे नुकसान पहुंचा रही होती है। चाय के मामले में भी ऐसा ही है।

अगर आपको बार-बार सिरदर्द होता है तो यह अधिक कैफीन का संकेत हो सकता है। खासकर अगर चाय न पीने पर सिर दर्द करे।

पेट में लगातार जलन, गैस या एसिडिटी की समस्या भी चाय की अधिकता बता सकती है। यह टैनिन और कैफीन का असर है।

नींद न आना या बेचैनी महसूस होना भी एक संकेत है। अगर रात को करवटें बदलते रहते हैं तो चाय कम करें।

दिल की धड़कन तेज होना भी कैफीन ओवरडोज का लक्षण है। कुछ लोगों को घबराहट भी होती है।

बार-बार पेशाब आना भी चाय के ज्यादा सेवन से होता है। कैफीन एक ड्यूरेटिक है यानी मूत्रवर्धक।

इससे शरीर से पानी और जरूरी खनिज निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।

दांतों पर पीले धब्बे या दाग भी चाय के अधिक सेवन से होते हैं। चाय में मौजूद तत्व दांतों को स्टेन कर देते हैं।

वजन बढ़ना या कम न होना भी एक संकेत है। अगर आप डाइट और एक्सरसाइज कर रहे हैं फिर भी वजन नहीं घट रहा तो चाय जिम्मेदार हो सकती है।

Alternatives To Regular Sweet Tea

अगर आप चाय छोड़ नहीं सकते तो कम से कम स्वास्थ्यवर्धक विकल्प तो चुन सकते हैं।

सबसे पहली और जरूरी बात – चीनी बिल्कुल बंद करें। शुरुआत में मुश्किल होगा लेकिन धीरे-धीरे आदत बन जाएगी।

अगर बिना मीठे चाय नहीं पी सकते तो स्टीविया का इस्तेमाल करें। यह एक प्राकृतिक स्वीटनर है जो डायबिटिक्स के लिए सुरक्षित है।

दूध की जगह कम फैट वाला दूध या बादाम मिल्क इस्तेमाल करें। इससे कैलोरी कम हो जाएगी।

ग्रीन टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। दिन में एक-दो कप ग्रीन टी पीना फायदेमंद है।

नींबू वाली ब्लैक टी भी अच्छा विकल्प है। नींबू विटामिन सी देता है और बिना चीनी के भी स्वाद अच्छा लगता है।

अदरक की चाय पाचन के लिए बहुत फायदेमंद है। यह सर्दी-जुकाम में भी राहत देती है।

तुलसी की चाय यानी तुलसी टी भी बेहतरीन है। यह इम्युनिटी बढ़ाती है और तनाव कम करती है।

दालचीनी की चाय ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है। डायबिटिक्स के लिए यह बहुत अच्छा विकल्प है।

पुदीने की चाय पेट को ठंडक देती है और पाचन सुधारती है। गर्मियों में यह बेहद राहतदायक है।

How To Reduce Tea Consumption

चाय की लत छोड़ना आसान नहीं है। खासकर जब आप सालों से रोज कई कप पी रहे हों।

लेकिन धीरे-धीरे और सही तरीके से कोशिश करें तो यह संभव है। अचानक पूरी तरह बंद करने की कोशिश न करें।

पहले यह तय करें कि आप रोजाना कितनी चाय पीते हैं। इसका हिसाब रखें। अगर पांच कप हैं तो पहले इसे चार करें।

एक हफ्ते तक चार कप पीएं। फिर अगले हफ्ते तीन करें। इस तरह धीरे-धीरे कम करते जाएं।

चाय की जगह पानी पीने की आदत डालें। जब भी चाय पीने का मन करे तो एक गिलास पानी पी लें।

कई बार प्यास को हम भूख या चाय की तलब समझ बैठते हैं। पर्याप्त पानी पीने से यह समस्या दूर होती है।

सुबह की पहली चाय छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है। इसकी जगह गुनगुना नींबू पानी या ग्रीन टी लें।

ऑफिस में चाय ब्रेक के दौरान हर्बल टी या ब्लैक कॉफी का विकल्प चुनें। कोशिश करें कि चीनी बिल्कुल न लें।

शाम की चाय को हल्के स्नैक्स से रिप्लेस करें। मुट्ठी भर मखाने या बादाम खाएं।

रात की चाय तो बिल्कुल बंद कर दें। इसकी जगह हर्बल टी या गर्म दूध लें। इससे नींद भी अच्छी आएगी।

अपने आसपास के लोगों को बताएं कि आप चाय कम कर रहे हैं। इससे वे आपको ऑफर नहीं करेंगे और सपोर्ट मिलेगा।

Medical Perspective On Tea Consumption

डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ क्या कहते हैं चाय के बारे में? आइए जानें मेडिकल साइंस की राय।

अधिकतर डॉक्टर मानते हैं कि संयमित मात्रा में चाय पीना नुकसानदायक नहीं है। लेकिन संयमित का मतलब है दिन में एक-दो कप।

और वह भी बिना चीनी या बहुत कम चीनी के साथ। दूध भी कम फैट वाला होना चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें मीठी चाय से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं को भी कैफीन सीमित मात्रा में लेना चाहिए। अधिक कैफीन गर्भ में पल रहे बच्चे को प्रभावित कर सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी चाय कम पीनी चाहिए। कैफीन ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ा देता है।

एनीमिया से पीड़ित लोगों को खाने के आसपास चाय नहीं पीनी चाहिए। यह आयरन के अवशोषण को रोकती है।

पेट की समस्या जैसे अल्सर या GERD वाले मरीजों को चाय से बचना चाहिए। यह उनकी स्थिति को बिगाड़ सकती है।

हार्ट के मरीजों को भी ज्यादा कैफीन नहीं लेना चाहिए। यह दिल की धड़कन को प्रभावित करता है।

बुजुर्गों को भी चाय कम पीनी चाहिए। उम्र के साथ शरीर की कैफीन को प्रोसेस करने की क्षमता कम होती है।

Real Life Cases Study

अब आपको कुछ वास्तविक उदाहरण बताते हैं जो समझने में मदद करेंगे।

राजेश 45 साल के हैं। वे रोजाना 6-7 कप चाय पीते थे। हर कप में दो चम्मच चीनी।

पिछले साल उन्हें थकान और बार-बार प्यास लगने की समस्या हुई। टेस्ट में पता चला कि उन्हें प्री-डायबिटीज है।

डॉक्टर ने चाय कम करने की सलाह दी। राजेश ने धीरे-धीरे चाय घटाई और चीनी बिल्कुल बंद कर दी।

तीन महीने बाद उनका ब्लड शुगर नॉर्मल रेंज में आ गया। वजन भी 5 किलो कम हुआ।

प्रिया 32 साल की हैं। वे खाली पेट चाय पीती थीं और फिर घंटों कुछ नहीं खातीं।

उन्हें गंभीर एसिडिटी और पेट दर्द की समस्या हो गई। एंडोस्कोपी में गैस्ट्राइटिस पाया गया।

डॉक्टर ने खाली पेट चाय पीना बंद करने को कहा। प्रिया ने आदत बदली और अब पहले नाश्ता करती हैं।

अब उनकी एसिडिटी की समस्या 80% कम हो गई है। पेट भी बेहतर महसूस होता है।

सुरेश 60 साल के हैं और टाइप-2 डायबिटिक हैं। लेकिन वे मीठी चाय पीना नहीं छोड़ पा रहे थे।

उनका शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं आ रहा था। दवाइयां भी पूरा असर नहीं कर रहीं थीं।

आखिरकार उन्होंने चीनी वाली चाय बंद की और ग्रीन टी शुरू की। दो महीने में ही शुगर लेवल में सुधार आया।

अब वे हेल्दी हैं और दवाइयों की जरूरत भी कम हो गई है। उनका कहना है कि चाय छोड़ना सबसे अच्छा फैसला था।

Prevention Better Than Cure Approach

बीमारी होने के बाद इलाज करने से बेहतर है कि पहले से सावधानी बरतें। यही बचाव की सोच है।

चाय के मामले में भी यही लागू होता है। अभी से अपनी आदतें सुधारें तो भविष्य में बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं।

युवा लोग सोचते हैं कि अभी तो सब ठीक है। लेकिन यही गलती बाद में भारी पड़ती है।

20-30 की उम्र में बनी गलत आदतें 40-50 में बीमारियों के रूप में सामने आती हैं। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

इसलिए अभी से चाय का सेवन नियंत्रित करें। चीनी की मात्रा कम करें या बिल्कुल हटा दें।

नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं। ब्लड शुगर और अन्य पैरामीटर चेक करते रहें। शुरुआती संकेत मिलने पर तुरंत सुधार करें।

संतुलित आहार लें। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करें।

रोजाना एक्सरसाइज करें। कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि जरूरी है। यह शुगर लेवल को नियंत्रित रखती है।

तनाव को मैनेज करें। योग और मेडिटेशन करें। तनाव भी ब्लड शुगर को बढ़ाता है।

पर्याप्त नींद लें। 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद की कमी कई बीमारियों को न्योता देती है।

धूम्रपान और शराब से दूर रहें। ये चाय से भी ज्यादा नुकसानदायक हैं।

Traditional Indian Healthy Drinks

हमारे देश में चाय से पहले कई स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ प्रचलित थे। आइए उन्हें फिर से अपनाएं।

हल्दी वाला दूध यानी गोल्डन मिल्क बहुत फायदेमंद है। यह इम्युनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करता है।

छाछ या लस्सी पाचन के लिए बेहतरीन है। यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है।

जलजीरा पेट को ठंडक देता है और भूख बढ़ाता है। गर्मियों में यह बहुत राहतदायक है।

नींबू पानी विटामिन सी से भरपूर है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है।

आम पन्ना गर्मियों में लू से बचाता है। यह मिनरल्स की कमी को पूरा करता है।

तुलसी का काढ़ा सर्दी-जुकाम में बहुत असरदार है। यह एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल है।

अदरक का पानी पाचन सुधारता है और सूजन कम करता है। यह वजन कम करने में भी मदद करता है।

दालचीनी का पानी ब्लड शुगर नियंत्रित करता है। डायबिटिक्स के लिए यह बहुत फायदेमंद है।

मेथी का पानी भी ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। रात को भिगोकर सुबह पीएं।

नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर है। यह प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक है।

Scientific Research And Studies

अब बात करते हैं कुछ वैज्ञानिक शोध की जो चाय और स्वास्थ्य पर हुए हैं।

एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग रोजाना 3 से अधिक कप मीठी चाय पीते हैं उनमें डायबिटीज का खतरा 25% बढ़ जाता है।

एक अन्य शोध में यह सामने आया कि अधिक कैफीन इंसुलिन सेंसिटिविटी को 15-20% तक कम कर देता है।

जापान में हुए एक लंबे अध्ययन में ग्रीन टी के फायदे देखे गए। नियमित ग्रीन टी पीने वाले लोगों में डायबिटीज का खतरा कम था।

लेकिन वे लोग भी बिना चीनी के ग्रीन टी पीते थे। चीनी मिलाने पर फायदे खत्म हो जाते हैं।

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी ने पाया कि खाली पेट चाय पीने से गैस्ट्रिक अल्सर का खतरा दोगुना हो जाता है।

ब्रिटेन में हुए शोध में यह सामने आया कि रात में कैफीन लेने से नींद की गुणवत्ता 40% खराब हो जाती है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी चेताया है कि अधिक चीनी वाली चाय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

कई अध्ययनों ने यह भी दिखाया कि टैनिन आयरन के अवशोषण को 60% तक कम कर देता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चाय अपने आप में बुरी नहीं है। लेकिन इसमें मिलाए जाने वाले तत्व और मात्रा समस्या पैदा करते हैं।

संयमित मात्रा में बिना चीनी की चाय पीना सुरक्षित है। लेकिन दिन में 5-6 कप मीठी चाय निश्चित रूप से नुकसानदायक है।

Government Health Guidelines Recommendation

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और FSSAI ने भी इस विषय पर दिशानिर्देश जारी किए हैं।

सरकार की सलाह है कि दिन में 400 मिलीग्राम से अधिक कैफीन नहीं लेना चाहिए। यह लगभग 4 कप चाय के बराबर है।

लेकिन यह मानकर कि आप बिना चीनी की चाय पी रहे हैं। चीनी वाली चाय के लिए सीमा और कम होनी चाहिए।

WHO का सुझाव है कि रोजाना की कैलोरी का 5% से अधिक शुगर से नहीं आना चाहिए।

एक वयस्क के लिए यह लगभग 25 ग्राम यानी 6 चम्मच शुगर है। इसमें सभी स्रोतों से आने वाली शुगर शामिल है।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन हैदराबाद ने भी कहा है कि प्रोसेस्ड शुगर का सेवन कम से कम होना चाहिए।

डायबिटीज फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने मरीजों को सलाह दी है कि वे मीठी चाय से पूरी तरह परहेज करें।

ICMR के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि संतुलित आहार और कम चीनी का सेवन स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

सरकार ने स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चलाए हैं। बच्चों को बचपन से ही स्वास्थ्यवर्धक आदतें सिखाई जा रही हैं।

कई राज्य सरकारों ने पब्लिक हेल्थ कैंपेन चलाए हैं जिनमें लोगों को चीनी के नुकसान बताए जा रहे हैं।

Final Thoughts On Tea Habits

तो क्या चाय बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए? नहीं, यह जरूरी नहीं। लेकिन संयम बहुत जरूरी है।

चाय हमारी संस्कृति का हिस्सा है और इसे पूरी तरह छोड़ना मुश्किल है। लेकिन स्मार्ट तरीके से पीना सीखें।

सबसे जरूरी है चीनी कम करना या हटाना। यह एक बदलाव ही बहुत बड़ा फर्क ला सकता है।

दिन में 1-2 कप से ज्यादा न पीएं। अगर ज्यादा चाहिए तो हर्बल टी या ग्रीन टी चुनें।

खाली पेट चाय न पीएं। सुबह पहले पानी पिएं, नाश्ता करें फिर चाय लें।

रात में चाय से बचें। इससे आपकी नींद बेहतर होगी और सेहत भी।

अपने शरीर के संकेतों को सुनें। अगर चाय पीने से कोई समस्या महसूस हो तो तुरंत कम करें।

नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहें। शुरुआती चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें।

याद रखें कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव बड़ी बीमारियों से बचा सकता है।

चाय के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ है। स्वस्थ रहेंगे तो सब कुछ enjoy कर पाएंगे।

अपने परिवार और दोस्तों को भी इस बारे में बताएं। एक-दूसरे को स्वस्थ रहने के लिए प्रोत्साहित करें।

छोटे कदम, बड़े बदलाव। आज से ही अपनी चाय की आदत पर ध्यान दें। आपका शरीर आपका शुक्रिया अदा करेगा।

यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। खुद से इलाज न करें।

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